केंद्र सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग बिल को मंज़ूरी दे दी है। अब यह बिल संसद में पेश किया जाएगा। तो आखिर इसमें ऐसा क्या है, जिस पर सबकी नज़रें टिकी हुई हैं? आइए जानते हैं इसके कुछ बड़े पॉइंट्स—
बिल में क्या है खास?
इस बिल का मकसद है ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए एक साफ़-सुथरा ढांचा तैयार करना और नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई करना। इसमें ये भी तय होगा कि कौन सा गेम “ऑनलाइन जुआ” माना जाएगा और कौन से नहीं।
याद रहे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में इसे हरी झंडी मिली है। हाल के दिनों में देशभर में ऑनलाइन फ्रॉड्स और नकली गेमिंग ऐप्स की बाढ़ जैसी स्थिति देखने को मिल रही थी। ऐसे समय में सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग को रेगुलेट करने का बड़ा कदम उठाया है।
पैसों वाले गेम्स पर रोक?
बिल पास होने के बाद कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन मनी गेम (यानि ऐसा गेम जिसमें खेलने के लिए पैसे देने पड़ते हों) ऑफर नहीं कर सकेगा।
ऐसे गेम्स के विज्ञापनों पर बैन
किसी को भी इन पैसों वाले गेम्स का विज्ञापन करने की इजाज़त नहीं होगी।
बैंक और पेमेंट्स पर रोक
कोई भी बैंक या वित्तीय संस्था ऐसे गेम्स से जुड़े पेमेंट ट्रांसफर की सुविधा नहीं दे पाएगी।
“ऑनलाइन मनी गेम” की परिभाषा
इस बिल में साफ कहा गया है, अगर किसी गेम को खेलने के लिए पैसे (फीस, डिपॉज़िट या कोई भी चार्ज) देने पड़ते हैं, तो वह ऑनलाइन मनी गेम माना जाएगा।
यह फर्क नहीं पड़ेगा कि गेम स्किल पर आधारित है या किस्मत (chance) पर।
फिलहाल भारत में कई राज्यों के अपने-अपने कानून हैं, जिनमें स्किल और चांस वाले गेम्स को अलग-अलग तरीके से देखा जाता है।
नियम तोड़ने पर सख्त सज़ा
अगर कोई व्यक्ति बिल में बने नियमों को तोड़ेगा तो कड़ी कार्रवाई होगी। तीन तरह की सज़ाएं तय की गई हैं—
- ऑनलाइन मनी गेम ऑफर करने पर → 3 साल की जेल + ₹1 करोड़ जुर्माना
- ऐसे गेम्स का विज्ञापन करने पर → 2 साल की जेल + ₹50 लाख जुर्माना
- पैसों का लेन-देन कराने पर → 3 साल की जेल + ₹1 करोड़ जुर्माना
आगे क्या होगा?
इसका आधिकारिक नाम होगा – प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025। उम्मीद है कि इसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय लोकसभा में पेश करेगा।