सोने की चकाचौंध जारी: Central Banks के Gold ख़रीदने से बदल रहा है Global Reserve System

सोने की चकाचौंध जारी: Central Banks के Gold ख़रीदने से बदल रहा है Global Reserve System
सोना एक बार फिर दुनिया के आर्थिक मंच पर अपनी दमदार पकड़ बना रहा है। शुक्रवार को Gold की कीमत $3,600 प्रति औंस के करीब पहुँच गई, जो अब तक का ऐतिहासिक स्तर है। अमेरिकी जॉब डेटा के कमजोर रहने से यह उम्मीद और मजबूत हो गई है कि US Federal Reserve निकट भविष्य में interest rate cuts करेगा, जिससे Gold को और सहारा मिलेगा।
2024 में 27% बढ़ने के बाद इस साल अब तक सोना 37% ऊपर है। Dollar की कमजोरी, नरम monetary policies और बढ़ती geopolitical tensions ने इस rally को लगातार fuel किया है। लेकिन सबसे बड़ा छिपा हुआ factor है – Central Banks का record तोड़ Gold Buying

Central Banks का सोने पर भरोसा

World Gold Council के मुताबिक, जुलाई 2025 में Global Central Banks ने नेट 10 टन सोना खरीदा। यह पिछले महीनों की तुलना में कम है, लेकिन फिर भी वे Gold के Net Buyers बने हुए हैं। Central Banks सोने को अपनी foreign currency reserves में इसलिए रखते हैं क्योंकि यह एक सुरक्षित संपत्ति (safe haven) मानी जाती है और inflation व geopolitical uncertainty से बचाव का काम करती है। आमतौर पर, जब सोने की कीमत बहुत ऊँची होती है, तो खरीद कम हो जाती है, लेकिन आज के दौर में uncertainty systemic बन चुकी है।
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में साफ कहा गया – “आज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अनिश्चितता अब हर जगह छा गई है, और इसका सबसे ज्यादा असर developing economies पर पड़ा है।”

चीन की आक्रामक Gold Buying

2023 से अब तक चीन का Central Bank aggressively सोना खरीद रहा है। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि चीन अपनी डॉलर पर निर्भरता कम कर सके और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते अपने reserves को मज़बूत बना सके। चीन की यही खरीदारी इस rally का बड़ा कारण है, जिसने 2023-2025 तक Gold को रिकॉर्ड हाई पर पहुँचा दिया।

Gold ने Euro और US Treasuries को पछाड़ा

Global Reserve System में एक बड़ा बदलाव यह है कि Gold अब Euro को पीछे छोड़कर दूसरा सबसे महत्वपूर्ण Reserve Asset बन गया है। अब केवल Dollar ही Gold से ऊपर है। इतना ही नहीं, 30 साल में पहली बार Central Banks के पास Gold की हिस्सेदारी US Treasury Securities से ज्यादा हो गई है।
आंकड़े बताते हैं कि
  • दुनिया के Central Banks के पास करीब 36,000 metric tons Gold है।
  • 2020 के बाद से, हर साल Central Banks ने 1000 टन से ज्यादा Gold खरीदा, जो पिछले दशक की तुलना में दोगुना है।
  • वर्तमान में Gold का बाजार मूल्य $4.5 ट्रिलियन तक पहुँच गया है, जबकि US Treasuries की वैल्यू लगभग $3.5 ट्रिलियन रह गई है।
इससे साफ है कि Gold का हिस्सा अब reserves में 27% तक पहुँच गया है, जबकि US Treasuries का हिस्सा घटकर सिर्फ 23% रह गया है।

भारत का झुकाव भी Gold की ओर

Reserve Bank of India (RBI) ने भी US Treasury bills की बजाय अपनी Gold Holdings बढ़ाना पसंद किया है।
  • जून 2024 में भारत के पास $242 बिलियन के US T-Bills थे, जो जून 2025 में घटकर $227 बिलियन रह गए।
  • इसके उलट, भारत की Gold Holdings बढ़ गईं।
भारत अभी भी US T-Bills में टॉप 20 investors में है, लेकिन यह बदलाव साफ दिखाता है कि देश अपनी बचत को डॉलर से हटाकर diversify कर रहा है।

क्यों बढ़ रहा है Gold Buying Trend?

विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके पीछे कई कारण हैं:
  1. High Inflation और Currency Volatility – Dollar कमजोर होने और inflation से बचने के लिए Gold सबसे सुरक्षित विकल्प है।
  2. Geopolitical Instability – Russia-Ukraine war और US-China tensions ने देशों को डॉलर से दूरी बनाने पर मजबूर किया।
  3. De-dollarisation – Developing countries डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश कर रही हैं।
  4. Safe Haven Asset – Gold का कोई counterparty risk नहीं होता और यह हमेशा वैल्यू बनाए रखता है।
Crescat Capital के मैक्रो स्ट्रैटेजिस्ट Tavi Costa के अनुसार, आज का परिदृश्य 1970s जैसा है जब inflation और geopolitical तनाव ने Gold को सबसे अहम reserve asset बना दिया था।

क्या Gold फिर से 1970s जैसा दबदबा बनाएगा?

1970-80 के दशक में Gold Global Reserves का 75% हिस्सा था। आज यह केवल 27% है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतना बड़ा दबदबा वापस आना मुश्किल है, जब तक कि दुनिया को एक लंबा आर्थिक संकट और double-digit inflation न झेलना पड़े।
फिर भी, आज का रुझान दिखाता है कि Central Banks लंबे समय तक Gold को अपनी Reserve Strategy में अहम जगह देने वाले हैं।

आगे का रास्ता

Metals Focus के मुताबिक, 2022 से हर साल Central Banks ने 1000 टन से ज्यादा सोना खरीदा है। 2025 में भी अनुमान है कि वे लगभग 900 टन Gold खरीदेंगे, जो पिछले दशक की औसत खरीदारी से दोगुना है।
भविष्य में खरीदारी की रफ्तार global economic conditions और geopolitical tensions पर निर्भर करेगी। लेकिन एक बात साफ है – Gold अब सिर्फ एक commodity नहीं, बल्कि National Wealth को सुरक्षित रखने का Global Standard बनता जा रहा है।

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