भारत की बड़ी और मिड-कैप कंपनियों की आने वाले 12 महीनों की कमाई (Earnings) के अनुमान में पिछले दो हफ्तों में 1.2% की कटौती हुई है। यह गिरावट पूरे एशिया में सबसे ज़्यादा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की तरफ से लगाए गए ऊँचे टैरिफ (कुछ प्रोडक्ट्स पर 50% तक) भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। भले ही सरकार घरेलू टैक्स में कटौती कर खपत (consumption) बढ़ाने की कोशिश कर रही है, लेकिन असर तुरंत नहीं दिख रहा।
कमज़ोर नतीजे और शेयर बाज़ार पर दबाव पिछले कई तिमाहियों से कंपनियों के नतीजे उम्मीद से कम आ रहे हैं, जिससे शेयर बाज़ार पर दबाव बना हुआ है। Nifty-50 इंडेक्स की कंपनियाँ सिर्फ 9% कमाई अमेरिका से करती हैं, लेकिन इतने ऊँचे टैरिफ का असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। एक अनुमान के मुताबिक, अगर 50% टैरिफ लंबे समय तक चलता रहा तो भारत की GDP ग्रोथ में करीब 1% की गिरावट आ सकती है, खासकर उन सेक्टर्स में जहाँ रोज़गार पर सीधा असर होता है जैसे कि टेक्सटाइल्स।
सरकार के कदम और उम्मीदें प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में टैक्स सुधारों का ऐलान किया है ताकि घरेलू खपत बढ़े और अर्थव्यवस्था को सहारा मिले। स्टैंडर्ड चार्टर्ड का अनुमान है कि इन टैक्स कटौतियों से 2027 तक भारत की GDP ग्रोथ में 0.35%–0.45% की बढ़त हो सकती है।
कमाई की रफ्तार धीमी 2020 से 2024 तक कंपनियों की कमाई में जहाँ 15%–25% की तेज़ ग्रोथ देखी गई थी, वहीं अब पिछले 5 तिमाहियों से ग्रोथ सिंगल डिजिट (6%–9%) पर अटकी हुई है। सबसे ज़्यादा गिरावट ऑटोमोबाइल, कैपिटल गुड्स, फूड-एंड-बेवेरेज और कंज़्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर्स में हुई है।
निवेशकों का भरोसा कमज़ोर बैंक ऑफ अमेरिका की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि भारत का शेयर बाज़ार, जो दो महीने पहले एशिया में निवेशकों की पहली पसंद था, अब सबसे कम पसंदीदा बाज़ार बन गया है।
सोसाइटी जनरल के एशिया इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट रजत अग्रवाल के मुताबिक, “2024 में सिर्फ 6% कमाई बढ़त रही और 2025 में भी रिकवरी की रफ्तार धीमी दिख रही है।”
आसान शब्दों में कहें तो:
भारत की कंपनियों की कमाई पर अमेरिका के ऊँचे टैरिफ का सीधा असर पड़ रहा है। सरकार टैक्स कम करके अर्थव्यवस्था को सँभालने की कोशिश कर रही है, लेकिन निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है और ग्रोथ की रफ्तार भी सुस्त नज़र आ रही है।
भारत की कंपनियों की कमाई पर अमेरिका के ऊँचे टैरिफ का सीधा असर पड़ रहा है। सरकार टैक्स कम करके अर्थव्यवस्था को सँभालने की कोशिश कर रही है, लेकिन निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है और ग्रोथ की रफ्तार भी सुस्त नज़र आ रही है।