भारतीय पूंजी बाज़ार नियामक सेबी (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने mutual fund उद्योग की सराहना की है। उन्होंने कहा कि इस उद्योग ने लोगों की बचत को सही दिशा में लगाकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पांडे एएमएफआई (AMFI) की 30वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।
हालाँकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि mutual funds को microcaps कंपनियों और कुछ खास तरह के debt instruments में निवेश करते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा:
“ब्लू-चिप कंपनियों से आगे बढ़कर विविधता लाना ज़रूरी है, लेकिन Mutual funds एक रिटेल प्रोडक्ट है, इसलिए microcaps या debt papers में निवेश करते समय पूरी सतर्कता ज़रूरी है। हर निवेश का सही documentation होना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।”
फर्जी रिडेम्प्शन और टेक्नोलॉजी के खतरे
सेबी प्रमुख ने एक और अहम खतरे की ओर ध्यान दिलाया—फर्जी रिडेम्प्शन। उन्होंने कहा कि आजकल धोखेबाज़ नए-नए तरीके अपनाते हैं और निवेशकों की पहचान चुराकर फर्जी लेन-देन करने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) को तुरंत कदम उठाने चाहिए और अगर कोई नया पैटर्न दिखे तो उसे बाकी एएमसी और रजिस्ट्रार एंड ट्रांसफर एजेंट्स (RTA) के साथ साझा करना चाहिए।
“इस लड़ाई में सबसे बड़ा हथियार है जानकारी को तुरंत साझा करना,” उन्होंने ज़ोर देकर कहा।
उन्होंने यह भी बताया कि जैसे-जैसे निवेशक डिजिटल माध्यम से जुड़ रहे हैं, वैसे-वैसे साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी का महत्व और बढ़ गया है।
“निवेशकों का डेटा सुरक्षित रखना उतना ही ज़रूरी है जितना उनका पैसा सुरक्षित रखना। म्यूचुअल फंड्स को इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।”
आउटसोर्सिंग पर ज़िम्मेदारी
पांडे ने यह भी कहा कि भले ही म्यूचुअल फंड कंपनियां काम को आउटसोर्स करती हों, लेकिन अंतिम ज़िम्मेदारी उन्हीं की रहती है। उन्होंने चेतावनी दी कि वेंडर या तीसरे पक्ष (third-party) के साथ किया गया कोई भी समझौता ऐसा होना चाहिए जिसमें डेटा लीक की गुंजाइश न हो।
भरोसा ही असली पैमाना
अपने भाषण के अंत में उन्होंने म्यूचुअल फंड उद्योग को याद दिलाया कि उनका असली पैमाना सिर्फ एयूएम (Assets Under Management) नहीं, बल्कि भरोसा और प्रबंधन है।
“भविष्य की इस यात्रा में नवाचार ज़रूरी है, लेकिन संतुलित तरीके से। गाँव, कस्बे और शहर तक निवेशकों तक पहुँचिए। भरोसे को हमेशा प्राथमिकता दीजिए।”
पांडे ने कहा कि म्यूचुअल फंड सिर्फ निवेश का साधन नहीं है, बल्कि यह आकांक्षाओं को पूरा करने और अवसर तक पहुँचने का पुल है।
“आइए, म्यूचुअल फंड्स को सिर्फ ‘सही है’ ही नहीं, बल्कि ‘ज़रूरी है’ बनाते हैं—यानी यह हर किसी के लिए डिफ़ॉल्ट चॉइस हो, उनकी ज़रूरत और जोखिम क्षमता के अनुसार।”