Mutual Fund में निवेश करके आप कैसे पा सकते हैं बेहतर रिटर्न – आसान हिंदी में

Mutual Fund से बेहतर Returns पाने के 15 आसान टिप्स

Table of Contents

आज के समय में Mutual Fund निवेश (Investment) करोड़ों निवेशकों की पहली पसंद बन चुका है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह निवेश करना बेहद आसान है और इसे कोई भी व्यक्ति – चाहे वह छोटा निवेशक हो या बड़ा – अपने वित्तीय लक्ष्यों (Financial Goals) को पूरा करने के लिए चुन सकता है।
लेकिन अक्सर निवेशक यह सोचते हैं – “सिर्फ Mutual Fund में पैसा लगाने से ही क्या अच्छे Returns मिल जाएंगे?” “ऐसा क्या करें जिससे हमारा Investment ज़्यादा Smart हो और हम बेहतर Returns कमा सकें?”
इन्हीं सवालों के जवाब के लिए हम इस आर्टिकल में 15 महत्वपूर्ण और आसान Tips लेकर आए हैं। अगर आप इन टिप्स को सम

1. स्पष्ट वित्तीय लक्ष्य तय करें (Set Clear Financial Goals)

किसी भी निवेश (Investment) की शुरुआत करने से पहले लक्ष्य (Goals) तय करना सबसे ज़रूरी है। बिना लक्ष्य तय किए निवेश करना ऐसा है जैसे बिना मंज़िल के सफ़र शुरू करना।
  • Short-term Goals (1-3 साल) जैसे – नई कार खरीदना, घर का डाउन पेमेंट, या विदेश यात्रा की योजना।
  • Medium-term Goals (3-7 साल) जैसे – बच्चों की स्कूलिंग, बिज़नेस शुरू करना या घर की Renovation।
  • Long-term Goals (10+ साल) जैसे – Retirement Planning, बच्चों की Higher Education या शादी।
जब आपके Financial Goals स्पष्ट होंगे, तो आप आसानी से तय कर पाएंगे कि आपको Equity Fund, Debt Fund या Hybrid Fund में निवेश करना चाहिए। सही फंड का चुनाव आपके Returns को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

2. म्यूचुअल फंड के अलग-अलग प्रकार समझें (Understand Different Types of Mutual Funds)

Mutual Fund एक ही तरह का नहीं होता। अलग-अलग जरूरतों और जोखिम लेने की क्षमता (Risk Appetite) के आधार पर कई प्रकार के फंड उपलब्ध हैं। सही प्रकार का चुनाव करना आपके रिटर्न को सीधे प्रभावित करता है।
  • Equity Funds – ये शेयर मार्केट में निवेश करते हैं। इसमें High Risk और High Return दोनों होते हैं। अगर आपका लक्ष्य Long-term (5-10 साल या उससे अधिक) है तो Equity Funds आपके लिए बेहतर विकल्प हैं।
  • Debt Funds – ये सरकारी बॉन्ड, कॉर्पोरेट बॉन्ड या अन्य Fixed Income Securities में निवेश करते हैं। इनका जोखिम Equity Fund से कम होता है और ये Stable Returns देने के लिए अच्छे हैं। ये उन निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं जो सुरक्षा और स्थिर आय चाहते हैं।
  • Hybrid Funds – इनमें Equity + Debt दोनों का मिश्रण होता है। इससे Risk Balanced रहता है। अगर आप न ज्यादा Risk लेना चाहते हैं और न ही बहुत कम Return पाना चाहते हैं, तो Hybrid Fund एक अच्छा विकल्प है।
ध्यान दें:
  • Direct Plan चुनने पर Expense Ratio कम होता है, जिससे Net Return ज्यादा मिलता है।
  • Regular Plan में आपको Distributor या Advisor को कमीशन देना पड़ता है।

3. लंबी अवधि के लिए निवेश करें (Invest for the Long Term)

शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में Short-term उतार-चढ़ाव (Volatility) आना बिल्कुल सामान्य है। अगर आप हर छोटे गिरावट से डरकर पैसा निकाल लेंगे तो अच्छे रिटर्न कभी नहीं कमा पाएंगे।
  • Compounding का जादू जब आप लंबे समय (5-10 साल या उससे अधिक) तक निवेशित रहते हैं, तो आपके Returns पर भी Return मिलना शुरू हो जाता है। यही Compounding कहलाता है, जो आपके छोटे-छोटे निवेश को बड़े फंड में बदल देता है।
  • जोखिम कम हो जाता है Short-term में मार्केट गिर भी सकता है, लेकिन लंबे समय में बाजार हमेशा ऊपर की ओर बढ़ता है। इसलिए Long-term Investment आपको सुरक्षित और स्थिर रिटर्न दिलाता है।
  • उदाहरण अगर आप 10,000 रुपये हर महीने SIP के जरिए 15 साल तक Equity Mutual Fund में निवेश करें, तो औसतन 12-14% रिटर्न पर आपका निवेश 30 लाख से बढ़कर 50-60 लाख तक हो सकता है।
इसलिए Mutual Fund से बेहतर रिटर्न पाने का सबसे आसान और कारगर तरीका है — लंबे समय तक निवेशित रहना।
Mutual Fund में निवेश करके आप कैसे पा सकते हैं बेहतर रिटर्न

4. सही फंड कैटेगरी चुनें (Choose the Right Fund Category)

Mutual Fund की दुनिया में एक ही प्रकार का फंड सबके लिए सही नहीं होता। आपको अपने Risk Appetite (जोखिम उठाने की क्षमता) और Financial Goal के अनुसार फंड चुनना चाहिए।
  • Large Cap Funds ये फंड बड़ी और मजबूत कंपनियों (Top 100 Companies) में निवेश करते हैं। ये कंपनियां स्थिर (Stable) होती हैं और बाजार की गिरावट में भी ज्यादा सुरक्षित रहती हैं। अगर आप कम जोखिम और भरोसेमंद रिटर्न चाहते हैं, तो Large Cap Funds सही विकल्प हैं।
  • Mid Cap Funds ये मध्यम आकार की कंपनियों (101–250 Companies) में निवेश करते हैं। इनमें Growth की संभावना अच्छी होती है, लेकिन जोखिम भी थोड़ा अधिक होता है। इन्हें Balanced Risk & Return कहा जा सकता है। Medium-term Goals के लिए सही रहते हैं।
  • Small Cap Funds ये छोटी कंपनियों (251 और आगे की Companies) में निवेश करते हैं। इनमें बहुत तेजी से Growth होने की संभावना होती है, लेकिन Risk भी सबसे ज्यादा रहता है। अगर आप High Risk लेकर High Growth पाना चाहते हैं और Long-term तक इंतजार कर सकते हैं, तभी Small Cap सही हैं।
Expert Tip: “निवेश करते समय Diversify करें यानी Large, Mid और Small Cap Funds का संतुलित मिश्रण रखें। इससे Risk भी कंट्रोल में रहेगा और Growth का फायदा भी मिलेगा।”

5. विविधीकरण का लाभ उठाएँ (Diversification Advantage)

निवेश की दुनिया में एक कहावत बहुत मशहूर है – “सभी अंडे एक ही टोकरी में मत डालो।” यानी अगर आप सारा पैसा सिर्फ एक ही जगह लगाएंगे तो Risk बहुत बढ़ जाएगा। Diversification का मतलब है पैसा अलग-अलग फंड और सेक्टर में बाँटना।
  • Asset Diversification केवल Equity में निवेश करने की बजाय कुछ पैसा Debt Funds (सुरक्षित और स्थिर रिटर्न) और कुछ Hybrid Funds (Equity + Debt का Mix) में भी लगाएँ। इससे Risk कम होगा और रिटर्न स्थिर बनेगा।
  • Sector Diversification Equity Funds में भी पैसा अलग-अलग सेक्टर में निवेश होना चाहिए, जैसे –
    • Banking
    • Pharma
    • IT
    • FMCG अगर किसी एक सेक्टर में मंदी आती है, तो दूसरा सेक्टर आपके नुकसान को संभाल लेता है।
  • Fund Diversification एक ही तरह के Fund House या Category में निवेश करने के बजाय अलग-अलग AMC (Asset Management Companies) और Fund Types चुनें।
Diversification आपके Portfolio को Balanced बनाता है और Market Risk को काफी हद तक कम कर देता है। यही Mutual Fund Investment की सबसे बड़ी ताकत है।

6. सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) अपनाएँ (Systematic Investment Plan)

SIP यानी Systematic Investment Plan Mutual Fund में निवेश करने का सबसे लोकप्रिय और स्मार्ट तरीका है। यह न सिर्फ आपके निवेश में Discipline लाता है, बल्कि छोटे-छोटे निवेश से भी आप बड़ा फंड बना सकते हैं।
  • हर महीने निश्चित राशि का निवेश SIP में आप हर महीने एक Fixed Amount (जैसे ₹500, ₹1000 या ₹5000) Invest करते हैं। इससे Investment आपके बजट पर बोझ नहीं डालता और नियमितता बनी रहती है।
  • Rupee Cost Averaging का फायदा Market कभी ऊपर तो कभी नीचे रहता है। SIP में जब Market नीचे होता है तो आपको ज्यादा Units मिलती हैं और जब Market ऊपर होता है तो कम Units मिलती हैं। लंबे समय में ये औसत (Average) आपके लिए फायदेमंद साबित होता है।
  • Compounding से बड़ा Corpus छोटे-छोटे निवेश भी लंबे समय तक Compounding की वजह से बहुत बड़ी रकम में बदल जाते हैं।
उदाहरण: अगर आप ₹5000 हर महीने 15 साल तक SIP में लगाते हैं और औसतन 12% का रिटर्न मिलता है, तो आपकी कुल निवेश राशि ₹9 लाख होगी, लेकिन Compounding से यह बढ़कर ₹25–30 लाख तक पहुँच सकती है।
SIP का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको Market Timing की चिंता नहीं करनी पड़ती।
Mutual Fund में निवेश करके आप कैसे पा सकते हैं बेहतर रिटर्न

7. लंप सम बनाम SIP (Lump Sum vs SIP)

Mutual Fund में निवेश करने के दो प्रमुख तरीके होते हैं – Lump Sum और SIP। दोनों के अपने फायदे हैं और सही समय पर सही रणनीति अपनाने से बेहतर रिटर्न मिल सकता है।
  • Lump Sum Investment जब आपके पास एक साथ बड़ी राशि हो (जैसे Bonus, Property Sale का पैसा या Savings), तो आप इसे एक बार में निवेश कर सकते हैं। Lump Sum सबसे अच्छा तब होता है जब Market Valuation Low हो यानी शेयर सस्ते मिल रहे हों। इस समय निवेश करने से Future Growth का बड़ा फायदा मिलता है।
  • SIP (Systematic Investment Plan) यह नियमित रूप से हर महीने छोटी राशि निवेश करने का तरीका है। SIP आपको Regular और Stable Returns दिलाता है और Market की उतार-चढ़ाव वाली चिंता से बचाता है।
  • Mix Strategy सबसे अच्छी रणनीति है कि आप दोनों तरीकों का उपयोग करें।
Example: Bonus या Extra Income आने पर कुछ पैसा Lump Sum लगाएँ और अपनी Monthly Income से SIP जारी रखें। इससे आपके निवेश में Balance और Growth दोनों रहेंगे।

8. एक्सपेंस रेशियो क्यों मायने रखता है (Expense Ratio Matters)

जब आप Mutual Fund में निवेश करते हैं तो Fund Manager और AMC (Asset Management Company) आपके पैसों को मैनेज करने के लिए कुछ चार्ज लेते हैं। इसी को Expense Ratio कहते हैं। यह आपके Investment Value का एक छोटा-सा प्रतिशत होता है, लेकिन लंबे समय में यह आपके Returns को काफी प्रभावित कर सकता है।
  • कम Expense Ratio = ज्यादा Returns अगर Expense Ratio कम है तो आपके रिटर्न पर कम कटौती होगी और Net Return ज़्यादा मिलेगा।
  • Direct Plan Direct Plan में कोई Middleman (Broker/Distributor) नहीं होता, इसलिए Expense Ratio काफी कम होता है। लंबे समय में Direct Plans से आपके Returns बेहतर हो सकते हैं।
  • Regular Plan Regular Plans में Broker या Distributor का कमीशन जुड़ा होता है, जिससे Expense Ratio थोड़ा ज्यादा होता है। इसका असर आपके Long-term Returns पर पड़ता है।
उदाहरण: मान लीजिए आपने ₹5 लाख का निवेश किया है और Expense Ratio सिर्फ 1% ज्यादा है। तो 20 साल बाद यह छोटा सा फर्क आपके Returns में लाखों रुपये का अंतर ला सकता है।
इसलिए Mutual Fund चुनते समय Expense Ratio पर जरूर ध्यान दें।

9. फंड का पिछला प्रदर्शन जाँचें (Check Past Performance)

किसी भी Mutual Fund में निवेश करने से पहले उसका Track Record देखना ज़रूरी है। पिछला प्रदर्शन यह दिखाता है कि Fund Manager ने Market की अलग-अलग परिस्थितियों में कैसा काम किया है।
  • 3 Year, 5 Year, 10 Year Performance Compare करें केवल 1 साल का रिटर्न देखकर फैसला न लें। लंबी अवधि के (5 या 10 साल) रिटर्न से पता चलता है कि Fund लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है या नहीं।
  • Benchmark से तुलना करें हर Fund का एक Benchmark Index होता है, जैसे – Nifty 50, Sensex, Nifty Next 50 आदि। देखें कि Fund का प्रदर्शन Benchmark से बेहतर है या नहीं। अगर लगातार Benchmark को Beat कर रहा है तो यह एक अच्छा संकेत है।
  • Consistency देखें, सिर्फ High Return नहीं कभी-कभी Fund एक साल में बहुत अच्छा रिटर्न देता है लेकिन अगले साल खराब कर देता है। बेहतर यही है कि आप ऐसे Fund चुनें जिनका प्रदर्शन लगातार (Consistent) रहा हो।
Expert Tip:
“Fund के पिछले प्रदर्शन को देखें, लेकिन केवल उसी के आधार पर निर्णय न लें। साथ ही Fund Manager का Experience और AMC की Reputation भी जाँचें।”

10. फंड मैनेजर के अनुभव और रिकॉर्ड (Fund Manager’s Track Record)

Mutual Fund की सफलता काफी हद तक उसके Fund Manager पर निर्भर करती है। वही तय करता है कि आपका पैसा किन कंपनियों और सेक्टर्स में लगाया जाएगा। इसलिए किसी भी Fund में निवेश करने से पहले Fund Manager की Strategy और Experience को समझना ज़रूरी है।
  • Consistent Performance वाले Fund Manager को चुनें ऐसे Fund Managers जिनके नेतृत्व में फंड ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया हो, वे अधिक भरोसेमंद माने जाते हैं।
  • Past Decisions और Portfolio Management देखें Fund Manager ने Market की गिरावट और उछाल के समय किस तरह के फैसले लिए, यह उनके अनुभव और समझ का संकेत देता है।
  • AMC (Asset Management Company) की Reputation सिर्फ Fund Manager ही नहीं, बल्कि पूरी AMC का ट्रैक रिकॉर्ड भी देखें। Strong Research Team और अच्छी Risk Management Strategy वाली AMC पर ज्यादा भरोसा किया जा सकता है।
Expert Tip: “अगर किसी फंड में अचानक Fund Manager बदल जाता है, तो उस फंड के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। ऐसे समय पर Portfolio Review करना ज़रूरी है।”

11. टैक्स एफिशिएंसी का महत्व (Tax Efficiency)

निवेश का उद्देश्य केवल रिटर्न कमाना ही नहीं होता, बल्कि टैक्स बचत (Tax Saving) भी उतना ही जरूरी है। सही फंड चुनकर आप न सिर्फ अच्छे रिटर्न पा सकते हैं, बल्कि टैक्स में भी बचत कर सकते हैं।
  • ELSS (Equity Linked Savings Scheme) Funds ELSS सबसे लोकप्रिय टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड है। इसमें निवेश करने पर आप Income Tax Act की धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट ले सकते हैं। साथ ही यह Equity आधारित होने के कारण High Returns की संभावना भी देता है।
  • LTCG (Long-Term Capital Gains) अगर आप किसी Equity Mutual Fund को 1 साल से ज्यादा समय तक होल्ड करते हैं तो उस पर मिलने वाले मुनाफे को LTCG कहा जाता है। इसमें ₹1 लाख तक का मुनाफा टैक्स-फ्री होता है। ₹1 लाख से अधिक पर 10% टैक्स देना पड़ता है।
  • STCG (Short-Term Capital Gains) अगर आप Equity Mutual Fund को 1 साल से पहले बेचते हैं तो उस पर मिलने वाले मुनाफे पर 15% टैक्स लगता है।
Expert Tip: “अगर आप Tax Saving + Wealth Creation दोनों चाहते हैं तो ELSS फंड्स सबसे अच्छा विकल्प हैं, लेकिन ध्यान रखें कि इनकी Lock-in Period 3 साल होती है।”

12. पोर्टफोलियो री-बैलेंसिंग (Rebalancing Portfolio)

निवेश करने के बाद सबसे ज़रूरी काम है अपने Portfolio की समय-समय पर समीक्षा (Review) करना। Market की स्थिति बदलती रहती है, इसलिए आपके Investment Allocation को भी समय-समय पर Adjust करना चाहिए। यही प्रक्रिया Rebalancing कहलाती है।
  • हर 6 महीने या साल में Review करें यह देखें कि आपके Goals, Risk Appetite और Market Conditions के हिसाब से आपका Portfolio सही दिशा में जा रहा है या नहीं।
  • Equity और Debt का Balance बनाए रखें शुरुआत में हो सकता है आपने 70% Equity और 30% Debt रखा हो। लेकिन अगर Equity तेजी से बढ़ गया तो उसका हिस्सा 80-85% हो सकता है। ऐसे में कुछ Equity बेचकर Debt में डालें ताकि आपका Balance वापस सही हो जाए।
  • Market Condition के हिसाब से Adjust करें अगर Market बहुत Overvalued है तो थोड़ा Conservative Approach अपनाएँ और Equity Allocation कम करें। अगर Market Correction आया है तो Equity Allocation बढ़ा सकते हैं।
Expert Tip: “Rebalancing का मकसद ज़्यादा Returns कमाना नहीं, बल्कि Risk Control करना है। इससे Portfolio हमेशा Balanced और आपके Goals के अनुसार रहता है।”

13. भावनाओं के आधार पर निर्णय लेने से बचें (Avoid Emotional Decisions)

Mutual Fund निवेश में सबसे बड़ी गलती होती है – Fear (डर) और Greed (लालच) के आधार पर निर्णय लेना। Market की चाल देखकर भावनाओं में आकर किया गया निवेश अक्सर नुकसानदेह साबित होता है।
  • Fear और Greed से सावधान रहें Market Crash के दौरान Panic Selling करना या अचानक तेजी (Bull Run) देखकर ज्यादा निवेश कर देना, दोनों ही गलतियां हैं।
  • Market Crash में Panic Selling से बचें गिरावट के समय अगर आप अपना निवेश बेच देते हैं तो आप Long-term Growth और Recovery का फायदा खो देते हैं। याद रखें – Market हमेशा गिरने के बाद फिर से ऊपर जाता है।
  • Data और Analysis पर निर्णय लें किसी भी Fund या Market Trend को देखकर निवेश करने से पहले उसके Past Performance, Fund Manager की Strategy और Market Condition को Analyze करें।
Expert Tip: “निवेश हमेशा Logic और Planning पर आधारित होना चाहिए, न कि डर और लालच पर।”

14. कंपाउंडिंग की शक्ति (Power of Compounding)

निवेश की दुनिया का सबसे बड़ा मंत्र है – “Money makes Money”। यही Compounding है। जब आपके निवेश पर मिलने वाला रिटर्न भी आगे रिटर्न कमाने लगे, तो आपका पैसा तेजी से बढ़ता है।
  • जल्दी शुरुआत का फायदा जितना जल्दी आप निवेश शुरू करेंगे, उतना ज्यादा समय आपके पैसों को Compounding से बढ़ने का मिलेगा।
  • Example: अगर आप 25 साल की उम्र से ₹5000 प्रति माह निवेश करते हैं, तो 15 साल में आपका Corpus करीब ₹25–30 लाख हो सकता है। वही निवेश अगर 35 साल की उम्र से शुरू करें तो Corpus लगभग आधा ही होगा।
  • लंबे समय तक निवेश जारी रखें SIP को बीच में बंद न करें। जितना लंबा समय आप निवेशित रहेंगे, उतना बड़ा Wealth बनेगा।
  • Compounding = Wealth Creation का Formula Compounding को अक्सर “दुनिया का आठवाँ अजूबा” कहा जाता है क्योंकि यह धीरे-धीरे आपके छोटे-छोटे निवेश को करोड़ों में बदल सकता है।
Expert Tip: “जल्दी शुरू करें, नियमित निवेश करें और धैर्य रखें — यही Compounding से अमीर बनने का असली राज़ है।”

15. अपडेटेड रहें और जानकारी लेते रहें (Stay Informed & Updated)

Mutual Fund निवेश सिर्फ पैसा लगाकर भूल जाने का नाम नहीं है। सफल निवेशक हमेशा Market Trends और Financial Updates पर नज़र रखते हैं। जितनी अच्छी जानकारी होगी, उतने स्मार्ट निर्णय लिए जा सकेंगे।
  • Market Trends और Financial News पर नज़र रखें शेयर बाज़ार, ब्याज दरों, अंतरराष्ट्रीय घटनाओं और आर्थिक नीतियों का असर Mutual Funds पर पड़ता है। नियमित रूप से Updates देखने की आदत डालें।
  • Regular Portfolio Review करें समय-समय पर अपने Portfolio की जाँच करें कि यह आपके Goals और Risk Appetite के अनुसार चल रहा है या नहीं। जरूरत पड़ने पर Rebalancing करें।
  • New Fund Offers (NFOs) और Policy Changes पर जानकारी लें कभी-कभी नए फंड (NFO) आपके Investment Strategy से मैच कर सकते हैं। साथ ही, सरकार या SEBI द्वारा किए गए नए नियम भी आपके Returns को प्रभावित कर सकते हैं।
Expert Tip: “निवेश में Knowledge ही असली ताकत है। जितनी अच्छी जानकारी होगी, उतना ही बेहतर आप Mutual Fund से Returns कमा पाएंगे।”

निष्कर्ष (Conclusion)

Mutual Fund आज के समय में छोटे-बड़े सभी निवेशकों के लिए एक शानदार Investment Option है। लेकिन सिर्फ निवेश करना ही काफी नहीं है — सही रिटर्न पाने के लिए आपको सही Fund Selection, सही Strategy, और लंबे समय तक Discipline अपनाना ज़रूरी है।
  • हमेशा Clear Financial Goals सेट करें,
  • SIP (Systematic Investment Plan) अपनाकर नियमित निवेश करें,
  • अपने Portfolio को Diversify करें,
  • समय-समय पर Review & Rebalance करें,
  • और सबसे ज़रूरी — Compounding की शक्ति को काम करने का समय दें।
अगर आप इन 15 स्मार्ट टिप्स को अपनाते हैं, तो आपका Mutual Fund Investment न केवल सुरक्षित रहेगा बल्कि आपको लगातार और बेहतर Returns भी दिलाएगा।
याद रखें:सही रणनीति + धैर्य = सफल निवेश (Successful Investment)”
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