भारतीय वित्तीय बाजार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। इसका ताज़ा उदाहरण 10 सितंबर 2025 को देखने को मिला, जब NSE India ने अपने नए प्लेटफ़ॉर्म NSE MF Invest पर एक ही दिन में 15 लाख से ज्यादा म्यूचुअल फंड ट्रांज़ैक्शन्स को सफलतापूर्वक प्रोसेस किया। यह आंकड़ा अब तक का सबसे बड़ा है और यह दिखाता है कि निवेशक अब डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स पर कितना भरोसा कर रहे हैं।
निवेशकों का बढ़ता विश्वास
इस उपलब्धि के पीछे NSE India के सदस्यों और डिस्ट्रीब्यूटर्स का बड़ा योगदान रहा। प्लेटफ़ॉर्म के ट्रांज़िशन (migration) के दौरान उनका सहयोग बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। यह कदम NSE की रणनीति का हिस्सा है, जिसमें लेन-देन को तेज़, सुरक्षित और आसान बनाना शामिल है, ताकि म्यूचुअल फंड्स की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।
Passive Investment का उभार
बीते कुछ सालों में Passive Investment यानी Direct Mutual Funds (DMFs) में निवेशक तेजी से रुचि दिखा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है Exchange Traded Funds (ETFs) और Index Funds की लोकप्रियता।
- पिछले 10 वर्षों में Passive Equity Funds का Assets Under Management (AUM) 61.5% की दर से (CAGR) बढ़ा है।
- इसके मुकाबले, Actively Managed Funds का CAGR केवल 25.4% रहा।
यह साफ संकेत देता है कि निवेशक अब लंबे समय तक स्थिर और किफायती निवेश विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
ताज़ा आँकड़े (Q1 FY26)
- Passive Equity Funds का AUM: 8.9 लाख करोड़ रुपए
- NSE-लिस्टेड कंपनियों में Passive Funds की हिस्सेदारी: 1.9%
- Actively Managed Funds का AUM: 39.5 लाख करोड़ रुपए (पिछली तिमाही से 14.8% अधिक)
Domestic Mutual Funds की मजबूती
हालांकि FY21 में आर्थिक चुनौतियों के कारण म्यूचुअल फंड निवेश में थोड़ी गिरावट आई थी, लेकिन इसके बाद से इसमें लगातार सुधार हुआ है।
- जून 2025 तक, NSE-लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैप में Domestic Mutual Funds की हिस्सेदारी बढ़कर 10.6% हो गई।
- इस बढ़त का सबसे बड़ा कारण रहा SIP (Systematic Investment Plan) का मजबूत रुझान।
जुलाई 2025 के रिकॉर्ड आंकड़े
जुलाई 2025 म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए ऐतिहासिक महीना साबित हुआ।
- SIP inflows: 28,000 करोड़ रुपए से अधिक
- New Fund Offerings (NFOs): 30,000 करोड़ रुपए
- Equity और Debt Funds का कुल AUM: 75 लाख करोड़ रुपए से अधिक
ये आंकड़े बताते हैं कि निवेशक अब नियमित और अनुशासित तरीके से निवेश करना पसंद कर रहे हैं।
Retail Investors का बढ़ता योगदान
भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में अब Retail Investors की भूमिका और अहम हो गई है।
- उनकी बढ़ती भागीदारी से Market Depth में मजबूती आई है।
- इससे देश की आर्थिक स्थिति (Economic Resilience) को भी बल मिला है।
Passive Funds और SIPs की बढ़ती लोकप्रियता निवेशकों के बदलते नजरिए को दर्शाती है।
आगे का रास्ता
NSE India का यह रिकॉर्ड सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि आने वाले समय की दिशा भी तय करता है।
- डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स का विस्तार
- निवेशक-हितैषी रणनीतियाँ
- और पारदर्शी लेन-देन की सुविधा
ये सभी कदम भारत में म्यूचुअल फंड ट्रांज़ैक्शन्स को और ज्यादा आसान, भरोसेमंद और व्यापक बनाने में मदद करेंगे।
निष्कर्ष
10 सितंबर 2025 का दिन भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए मील का पत्थर है। NSE MF Invest पर एक ही दिन में 15 लाख से अधिक ट्रांज़ैक्शन्स प्रोसेस होना इस बात का सबूत है कि भारतीय निवेशक अब Digital Platforms को पूरी तरह अपना चुके हैं।
यह रुझान आगे भी जारी रहने की उम्मीद है और इससे भारतीय वित्तीय बाजार और मजबूत होगा।
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